मचलती लहरें
जहां-जहां तुम जाती हो,
बाढ़ खुशियों की भर देती हो।
तेरे आनें की आहट,
मुस्कराहट में खिलती है।
तेरी उफानी नजरों से
तूफान संगीन हो जाते है।
अहसास तुम्हारे उफान का,
रेड अलर्ट के साथ गूंजता है।
तेरे होंठों की हंसी,
सुनामी-सी मचलती है।
तेरी चुप्पी की आंधी,
दिल दहला देती है।
लोग कहते हैं महिमा,
मैं कहता हूँ करिश्मा।
तेरे मचलती लहरों से,
खिलता जीवन सृष्टी में।
जहां-जहां से तूम गुजरती हों,
दुनिया, नक्शा नया बनाती हों।
तुम सिर्फ़ नदियां नहीं…
ज़िंदगी का सार कहलाती हों।
12.09..2025
