” Innocent Stress “
Stress तो बस Stress ही होता है,
आपका हो या मेरा,
सबका same होता है…
घर लौटते वक़्त उसे workplace में ही छोड़ देना चाहिए,
अगर साथ आ ही जाए तो दोस्त के पास भेज देना चाहिए…
कभी हँसकर भुलाना चाहिए,
कभी Coffee में घोलना चाहिए,
छोटी सी Walk या Long Drive में उसे कहीं छोड़ देना चाहिए,
या फिर किसी गीत की धुन में बहा देना चाहिए…
Stress कोई दुश्मन नहीं होता,
वो भी तो Innoscent होता है,
बस उसे पहचानना, समझना होता है,
और समय आने पर
प्यार से मुक्त कर देना होता है…
क्योंकि
हमें जीना है… खुलकर,
हँसते – खेलते हुए, और पूरे दिल से…
थोड़ा मन को शांत करना होता है,
खुद से थोडी बातें करनी होती हैं,
अपने आप से कहना होता है, “सब ठीक हो जाएगा,”
और हल्की सी मुस्कान के साथ आगे बढ़ जाना होता है…
कभी किसी शौक़ में खो जाना होता है,
खुद को भूलकर कोई गाना गुनगुनाना होता है,
चाहे कोई सुने या न सुने…
खुद के लिए एक कविता रचनी होती है,
कभी कुछ न करते हुए बस यूँ ही चुपचाप लेटे रहना होता है,
और खुद के साथ ही कहीं खो जाना होता है…
शाम के ढलते सूरज को देखकर,
यह समझना होता है
कि उसका भी दिन खत्म हो गया है,
तो हमें भी
थोड़ा रुक जाना चाहिए,
साँसों का बोझ
थोड़ा हल्का करना चाहिए…
Stress को टाल तो नहीं सकते,
पर उस पर नाच जरूर सकते हैं…
ज़िंदगी की लय पर…
थोड़ा धैर्य, थोड़ी धुन,
और भरपूर जीना…
क्योंकि …
हमें Stress में नहीं,
आनंद में जीना है…🌿✨🍁
04.05.25
