19. कामिनी
‘सुशी’ आपल्याला टाळत आहे
असे समजुन
‘सुश्या’ घरी परत येतो…
आणि…
(…..आगे…..)
खुशियो कि वो कामिनी थी,
नाम कि वो ‘सुशी’ थी,
पल मे रोना , पल मे हसाना,
हम दोनो का था यही एक खेलना,
क्यो वो इतना सुनती थी,
रुलाकर भी क्यो हसती थी,
दिन रात हमारी हस्तीं थी,
चलते चलते क्यो रुकती थी,
हर पल मुझको कॉल करती थी,
सर दर्द मेरा बढाती थी. “
…..या विचारातच ‘सुश्या’ ला झोप लागते…..
