11. ” मेट्रो में.. “
(…..आगे…..)
दिन , रात, सुबह , शाम बाते अब होती थी,
मिलना न था लेकिन फोन पर दुनिया सितारों संग बसती थी,
वोडाफोन पर fnf सुविधा होती थी,
पहली किरण से पहले उनकी आवाज सहलाती थी,
मेट्रो में दोनो कही अनजाने मे खो रहे थे,
चलते चलते भिड में एक दुसरे को खोज रहे थे,
बुलेट ट्रेन सा स्पीड अब दिन का होता था,
एक मिनट का कॉल भी मुस्कान देता था,
देखते ही देखते आवाज ब्रेक होने लगा,
वक्त दोनो का करियर की खोज में खोने लगा,
दो सितारे टेरेस पे देर रात खिलते थे,
बातों बातों में कॉफी के जायके में ही मिलते थे……
