८. ” समझ न आए “
(….आगे….)
पेट में होने लगे जैसे अचानक अनजान उलझनें,
कैसे बताऊँ उसे ‘सुश्या’ अभी है असमंजस में।
करीब आते-आते क्यों रुक गए उसके पाँव,
कोई तो बताए उसे, आखिर हुआ क्या घाव?
जो दिल की बातें कहा करती थी साफ़,
दिन-रात सुनने वाली ‘सुशी’ अब हो गई ग़ायब आफ़।
