७. ” मासूम और भोले “
(….आगे….)
सुश्या ने किया सुबह सुबह फोन,
“मुझसे मिलो, नहीं तो हो कर रहूंगा अनजान “।
दिखाईं उसने नाराजगी झूठी,
ना-ना करते हुए अंत में हो गई बात मीठी।
जब खिंच जाते हैं खरोंच दिल के अंदर,
साँसें भी लगती हैं जैसे बोझ नाक पर।
सुश्या के जज़्बात थे मासूम और भोले,
पर अनजाने में उन्हीं ने दिए पेट में गोले।
