10. ” दो पंछी… दो दिशा “
(…..आगे…..)
सफर इनके कॉलेज का जैसे पल में गुजर गया,
वक्त ने फिर जुदाई के क्यों इन्हें रुला दिया,
निकल पड़े दो पंछी दो दिशाओं की ओर में,
उम्मीद भरी उमंग थी टकराएंगे कभी राहों में,
डगर हो शहर की या राहें जिंदगी की,
थे एक दिशा में लेकिन उम्मीद न थी बिछड़ने की,
वक्त ने फिर अचानक ऐसे करवट बदल लिया,
Training के लिए ‘सुश्या’ का state बदल दिया,
रातोरत ‘सुश्या’ का sim card कैसे खराब हुआ,
नंबर था जिसमे ‘सुशी’ का वही दगा दे गया,
कैसे कहता वो किसी से की याद किसी की सताती है,
शोर में भी कभी कभी आवाज उसकी आती है,
ईमेल भी पुराना ‘सुश्या’ ने तभी ना check किया,
न जाने कैसे किस्मत ने connection तोड़ दिया,
इंतजार उस पल का था जब नंबर उसे मिलना था,
‘सुशी’ की डाट सुनकर उसे तब मनाना मुश्किल था….
