५. ” न लिखा हुआ “
(….आगे….)
कागज न था उसने लिखा हुआ,
शरमाने में वो हसीना के सबकुछ भुला हुआ,
खो गए दोनों ही चाहत की दुनियां में…
अनजाने में चल पड़े उन सपनों की चांदनियों में,
हर रात अब चांद उनका खिल उठाता है,
बातों ही बातों में धीरे से अनचाहा सूरज उगता है,
अचानक एक दिन सुश्या बोल पड़ा,
कागज वो लव्ह लेटर का मुझे मिला हुआ,
सुनते ही सुशी ने किया फोन उसका cut,
टिंग टिंग मेसेज आया जो गलती से हुआ delete. . .
