३. अबोल उन आखों में…
(….आगे….)
अबोल उन आखों में,
उन निशब्द होठों में,
हों गुलाबी खिल उठी वो शर्मिली,
खत्म होते ही कॉफी फिर मिलेंगे बोली,
जैसे प्रित की कली हो अभी अभी खिली….
३. अबोल उन आखों में…
(….आगे….)
अबोल उन आखों में,
उन निशब्द होठों में,
हों गुलाबी खिल उठी वो शर्मिली,
खत्म होते ही कॉफी फिर मिलेंगे बोली,
जैसे प्रित की कली हो अभी अभी खिली….