२५. ” दूर देस “
(…..आगे…..)
भागदौड़ में गुलाबी साल यूँ ही गुजर गया,
फिर से बिछड़ने का दिन चुपके से आ गया,
सुशी का पाँव सुश्या को छोड़ आगे न बढ़ सका,
सुश्या का हाथ भी उसके हाथ से छूट न सका,
वो सारे दिन फिर से दोनों को याद आने लगे,
निःशब्द सुश्या और सुशी के शब्द अटकने लगे,
ट्रेन ने सीटी बजा दी फिर से,
सुश्या ने कहां– मत जाओ, वरना मैं रूठ जाऊंगा तुम से,
निकलते ही train सुशी ने धीरेसे flying kiss दिया,
शरमाई हुई उसकी पलकों ने घायल सुश्या को किया,
कांच के उस पार अब सुशी ओझल हो गयी,
सुश्या के कदम प्लेटफॉर्म पर ही थम गए,
अगले ही पल, “Calling Sushi…” मोबाइल पर नजर आयी,
पढ़ते ही Sushi, गालों पर सुश्या के बहार आ गयी,
कोयल भले ही दूर देस चली गई थी,
आवाज उसकी पल में फोन में लौट आयी थी…..
( कविता मालिका ” ‘नेत्रा’ और ‘पत्र’ “
……भाग-२, समाप्त )
