२२. ” टीमटीमाती चांदनी “
(…..आगे…..)
आज सुशी को जैसे एक सपना मिल गया,
गुनगुनाते हुए उसने एक नई कविता रच डाली…
” चांद है खोया खोया किसी अज्ञात दिशा में,
बसेंगे जाकर हम हमारी अलग दुनिया में,
सपनों की दुनिया में होगा बसेरा हमारा,
मिलकर बनाएंगे एक नया सागर किनारा,
प्यार के रंगों से सजेगी हमारी उमंगे,
हर पल एक दुसरे का साथ हम पायेंगे ,
आंखों ही आँखों में मधुर मुस्कान हम देखेंगे,
बाहों में हमारी स्वर्ग नया हम बनायेंगे,
लिखुंगी वही मैं हमारी नई कहानी,
भरना रंग उसमें तुम तुम्हारे रूमानी,
नयनों मे तुम्हारे हम ऐसें खो जायेंगे,
सासों, पलकों में जैसे हम समा जाएंगे,
बाहों में मिलेंगी नींद सुकून की,
सुनूंगी धड़कन मैं मेरे नाम की,
खो जायेंगे हम चाहत में हमारी,
गायेंगे हम एक नयी कहानी प्यारी,
लगता है मुझे जैसे उड़ते हुए आना,
हाथ थाम तुम्हारा चांद गगन में है जाना,
सजने दो चांद रात उड़ते गगन पर,
कभी खत्म न होगी प्रीत अपनी उम्र भर,
हमारे ही लिए है ऊपर चंदेरी टिमटिमाते कंबल,
चांद चांदनी के साथ गायेंगे नया प्रेम राग बादल,
वही कही पनपती है तेरी मेरी कहानी,
फिर नई बनेगी प्रीत हमारी सुहानी,
हसीन इस नजारे मे चांदनी भी टिमटिमायेगी,
देख उसे आज चांद भी मुस्कुराएगा…. “
– सुशी
