२१. भूल जाओ
(…..आगे…..)
सुबह उठ सुश्या-सुहास मिले डेक्कन में,
सुश्या भी अब धीरे-धीरे आया एहसास में,
दिन रात बतियाने वाली दोस्ती का अंत नहीं,
काले बादलों का कही एक ठिकाना नहीं,
बॅग पैक कर सुश्या गांव चला गया,
भूल जाओ अब तुम भी सुशी को कह दिया…
२१. भूल जाओ
(…..आगे…..)
सुबह उठ सुश्या-सुहास मिले डेक्कन में,
सुश्या भी अब धीरे-धीरे आया एहसास में,
दिन रात बतियाने वाली दोस्ती का अंत नहीं,
काले बादलों का कही एक ठिकाना नहीं,
बॅग पैक कर सुश्या गांव चला गया,
भूल जाओ अब तुम भी सुशी को कह दिया…