” नेत्रा और पत्र ” भाग -२
‘सुश्या’ और ‘सुशी’ की काव्य श्रृंखला में हमने देखा –
‘सुश्या’ और ‘सुशी’ की दोस्ती होती है और ‘सुशी’ गाँव चली जाती है।
अब देखते हैं आगे…
इस बार ‘सुशी’ का कॉलेज देर से शुरू हो रहा था, ‘सुश्या’ का कॉलेज शुरू हो चुका था।
परीक्षाएँ करीब आ रही थीं, भागदौड़ में उसे ‘सुशी’ के लौट आने के बाद भी समय निकालना
संभव नहीं हो पाता…
१. ” सावन के बाद “
देखते ही देखते छुट्टियां बीत गयी,
मानो जैसे एक जिंदगी गुजर गयी,
इस बार ‘सुशी’ का कॉलेज सवान के बाद शुरू हुआ,
भाग दौड़ करते ‘सुश्या’ को अब मिलना मुश्किल हुआ,
Second half इस story में
अब करवट जिंदगी ले रही थी,
भीड़ भरी दुनिया में
यहा एक कहानी बन रही थी,
दौड़ते दौड़ते दोनो की सांसे थम अब रही थी,
रूम में आतेही अब नींद थकान की आ रही थी,
रात बीच में अब याद अचानक आ रही,
बाते करते करते आवाज अचानक सो रही,
कॉल, मेसेज भी एक नींद लेकर जग रहे थे,
आधी रात के बाद अब दो सीतारे खिल रहे थे,
दीन, रात, सुबह, शाम बाते नयी होती थी,
इंद्रधनुष जैसे हर बात तब बरसात मे रंगती थी…
