१८. ” कहने को कुछ “
(…..आगे…..)
सुश्या ने जल्दी में शॉवर लिया,
बाइक उड़ाते हुए कॉलेज पहुँच गया,
दिनभर लेक्चर और वर्कशॉप ने सुश्या को थका दिया,
शाम ढलते ही कमरे पर आ पल भर में सुस्त हो गया,
दिनभर सुशी को एक भी संदेश नहीं गया था,
सुशी भी गहरी नींद से बस शाम को ही जागी थी,
दोनों का पेट आज मिलकर ही भरा,
पर शब्द, जो दिलों में थे, वे मैसेज में ही खत्म हुए,
मन के शब्द मन में ही रह गए,
पर रोज के calls और sms ही साथी बन गए,
भागदौड़ में दिन यूँ ही फिसलते रहे,
तारों से बातें करते-करते भोर की पहली किरण भी मुस्कुरा गई,
कहने को कुछ थीं, बस वही कुछ बात ,
तय हुआ कि मिलकर बात करेंगे परीक्षा के बाद।
