22. “.एक दिन.”


(…..आगे…..)

‘सुशी’ को मनाना मुश्किल न था,
बस उसके एक हसीं का इंतजार था…

आवाज ‘सुश्या’ की सुनकर
देखो ‘सुशी’ पिघल गयी,
मिठी डांट भी ‘सुशी’ की ‘सुश्या’ का दिल छू गयी,