20. ” बात ना करो “
(…..आगे…..)
सुबह उठकर ‘सुशी’ ने जब
देखा,
आसुओं के बांध को उससे ना रुका,
रोते हुए कॉल कर,
उसने ‘सुश्या’ को ऐसे सुनाया,
सुबह सुबह आँखों के सामने उसके तारा चमकाया…
बात ना करो अब मुझसे,
कोई नाता नहीं है अब तुमसे,
पत्थर का दिल है तुम्हारा,
जो साथ भुला दिया हमारा,
कीमत ना होगी दोस्तों की तुम्हे,
देर से समझ आयी ये बात हमे,
Workaholic बन Robo बने हो तुम,
क्या कहे अब तुमसे दिल की बात हम…
– सुशी
