१५. ” नेत्र द्वंद्व “
(…..आगे…..)
सुश्या आधा किलोमीटर दौड़ता हुआ वहाँ आया,
सुशी मगर Scooty पर मिलने आई,
सुशी को देखा, मन हरषाया,
पर Scooty देख,थोड़ा चौंक गया,
“Morning walk” कहकर मुझसे भाग लगवाई,
ख़ुद आराम से Scooty पर सवारी लगाई।
यह सुनकर सुशी हँस पड़ी, खिलखिलाकर बोली,
“अरे! बस यूँ ही बोल दिया था, बात थी भोली,
कारण चाहे जो भी हो, मुलाक़ात है अहम ,
दौड़कर आया, ये गलती है तेरी…”
थोड़ा सा उतरा चेहरा, कॉफी शॉप दिखाया,
हँसती हुई सुशी ने, “Sorry” लजाकर सुनाया।
दोनों ने राहत की ली साँस,
मुलाक़ात हुई, कटे सब प्यास,
आमने-सामने बैठकर नेत्र द्वंद्व छिड़ा,
वेटर के आने से पल वह टूट गया।
कॉफी मंगाई, वेटर को दौड़ाया,
सुशी ने शरमा कर बस मौन अपनाया,
गुलाबी सर्दी में थी गुलाबी सी वो कली,
देख उसे, सुश्या की बोली भी चली गई छली…
