18. ” निशब्द “
(…..आगे…..)
मेसेज २
निशब्द है मन मेरा,
यह शांति भी कितनी शोरगुल वाली है,
बिना कुछ सुने ही,
बहुत कुछ कह जाती है….
कितने ही सवाल है मन में
जमा होते-होते छलक पड़े,
नम इन आँखों से अनजाने में ही
आँसू बनकर बह चले….
– सुश्या
18. ” निशब्द “
(…..आगे…..)
मेसेज २
निशब्द है मन मेरा,
यह शांति भी कितनी शोरगुल वाली है,
बिना कुछ सुने ही,
बहुत कुछ कह जाती है….
कितने ही सवाल है मन में
जमा होते-होते छलक पड़े,
नम इन आँखों से अनजाने में ही
आँसू बनकर बह चले….
– सुश्या