१४. ” जैसे ही सुबह हुई “
(…..आगे…..)
सुबह उठते ही सुशी ने देखा संदेश सुश्या का पहला,
पढ़ते ही जैसे स्वर्ग ही उतर आया ज़मीं पर अकेला।
कॉल किया फिर सुश्या को झटपट,
बोली – शाम की बाट न देखें अबकी दफ़ा,
चलो कॉफी संग करें आज सुबह की सैर,
सुनते ही सुश्या तो उड़ चला जैसे बैर!
बोला – मैं तो पहुँच गया Off-Rd पे यार,
सुशी हँसी – नहीं, मिलते हैं Connaught Place इस बार।
सुश्या ने मना किया – वहाँ आते हैं HOD टहलने,
क्यों बस वे तुझे ही हैं घूरते? – सुशी बोली चुटकले चलने।
ना-ना करता हुआ अंत में सुश्या मान गया,
इधर-उधर देखता हुआ पहुँच गया वह Connaught पर।
