16. ” चाहती हूं “
(…..आगे…..)
‘सुशी’ का लिखने का सिलसिला जारी था,
इस उम्मीद पे ,.. कभी तो ‘सुश्या’ पढ़ेगा.
चलो हार गयी मैं
दूरियों की इन घड़ियों में,
नंबर यही अब मेरा है
तुम्हारी आवाज के इंतजार में,
दोस्त ये तुम्हारी यही है,
एक आवाज सुनना चाहती है,
कैसे बताऊं तुम्हे मै ऐसे,
हर घड़ी कैसे यहा कटती है,
याद एक पल मुझे करना
अगर ना देना नंबर तुम्हारा,
Call किसी PCO से करना
कभी ना कहुंगी फिर दोबारा,
– सुशी
