१३. ” चांदणी रात सी “
(….आगे….)
सुश्या भी सुशी को मैसेज भेजकर सो गया…
चांदनी रात सी बन तुम जिंदगी में आयी,
चुपकेसे मेरे दिल और मुस्कान में समायी,
हर पल चाँदनी यहां चांद को छेडती है,
रुठ कर चांद बादलों में जा बैठता है,
निशब्द मन मेरा तूम्हारे लिए ही कुछ कहता है,
अनजान सी बेचैनी मन में महसूस करता है,
ये शब्द तुम्हारी भावनाओं का इजहार करते है,
आगाज नहीं पर दिल ही दिल में इकरार करते है,
सूनी सूनी सी होती महाफिल यहां,
अगर ना होती तुम कुछ पल जहां,
जब एक-दूसरे की महसूस होती है कमी,
आखों में आ जाती है सहेज ही नमी,
अकेले में खुद को खोजने निकल पड़ते है हम,
जब दूर जाते हूये महसूस होती हो तुम,
लगता है बोझ सांसों का यहां,
सुनी है महफिल चांद सितारें सारा जहां,
जख्म के ऊपर प्यार भरी फूंक हो तुम,
खुशियों के सागर की पहचान है हम,
बेवजह याद करना मतलब ही हो तुम,
सपनों की दुनिया का स्वर्ग है हम,
अनजाने में कभी हम मिले थे एक-दूसरे से,
न जानते थे हमसफर हम निकलेंगे जनम जनम से,
तुम्हारे ही साथ मन की शांति सुकून है,
तुम्हारे ही साथ मिली सुखों की दुनिया नई है,
चाँदनी रात सी जब जब तुम सजती हों,
तब तब नही होता वो खोया खोया चांद…..
– सुश्या
