१२. “खोया खोया चांद “
(…..आगे…..)
मुस्कराते, गुनगुनाते हुए सुशी सो जाती है….
चांद और चांदनी न जाने कहा खो गए,
हम और तुम भी उन सितारों से हो गए,
अकेले में खुद को खोजने निकलते है,
जब भी दूर जाते एकदूसरे से देखते है,
तुम्हारे बिना जीवन सुना सुना सा लगता है,
तुम्हारी आवाज़ से ये दिल दरिया भरता है,
जाने से तुम्हारे जो दिल ये मुरझाता है,
आने से तुम्हारे वही हसीन ख्वाब बुनता है,
तुम्हारे साथ ही जीवन का सफर है रंगीन,
तुम्हारे बिना सब यादें है संगीन,
तुम्हारे प्यार में सुकून और जीवन का मीठा गीत है,
तुम्हारी यादों में मिठास और दिल में छुपी प्रीत है,
साथ ही तुमसे दिल का चैन, एक सुकून है,
ये ज़िंदगी की धड़कन तुम्हारी ही धून है,
तुम्हारी यादों का संगीत दिल को मेरे छू गया,
तुम्हारे ही साथ मैने जीवन महफिल को पाया,
वो हसीन रात अब चांदनी संग सज रही है,
खोया खोया चांद अब फिर मुस्कुरा रहा है….
– सुशी
