14. ” Hate you “
(…..आगे…..)
इस अनजान शहर में रहा ना जाए,
कैसे कहे अब ‘सुशी’ से सहा ना जाए…
जैसे जैसे इंतजार बढ़ रहा था,
गुस्से का ज्वालामुखी ‘सुशी’ के अंदर पनप रहा था…
ना देना replay किसी email का,
असर ना होगा अब तूम्हारी सफाई का,
कभी ना भूलूंगी मैं,
के दिया दोस्ती का तुमने जो बुझाया,
जान से ज्यादा संभल के मैंने,
जिसे था मन-मंदिर में जलाया,
माफ करना मुझे तुमने,
जो मैने वक्त तुम्हारा ज्यादा लिया,
कभी ना सोचा था मैंने
ऐसा ये दिल तुमने तोड़ दिया,
कभी ना किसी को मिलेगी,
दोस्त बुरी मेरे जैसी,
Hate you कभी ना मैं भूलेगी,
बेरुखी तुम्हारे पत्थर दिल की ऐसी,
समझ लेना अब तुम,
आज, अभी नेत्रा तुम्हारी यहां मर गयी,
अब ना रहा कोई गम,
आत्मा मेरी ऐसें रोते रोते देखो चली गयी,
– सुशी
