११. ” सपनो की यात्रा “
(…..आगे…..)
२ महीनों के इंतज़ार के बाद आज मुलाक़ात तय हुई थी,
लेकिन सुशी के accident की वजह से वह हो नहीं सकी,
सुशी की आँखें और गाल रो-रोकर लाल हो गए थे,
लगातार सुश्या को sorry के संदेश आ रहे थे,
सुश्या ने अब उसे किया good night का call,
और कहा, “अगर हंसी तो दिल की हालत सुना दूंगा…”
हंसते-हंसते सुशी ने फ़रमाइश कर दी,
“अब ही सुनाओ मुझे कोई कविता,” वह बोली,
सुश्या ने जो दिल से आया, वह सुना दिया,
सुनाते-सुनाते उसे सपनों की दुनिया में सुला दिया…

” आज हमारा दिनभर मिलना संभव नहीं था,
क्या हम रात में सपनों की यात्रा करें?
चलो मिलते वही उसी चांद पर,
करने हम हमारे दिलं की बात रात भर।
देखोगी जब तुम आखों में मेरी,
मिलेगी तुम्हे वही अभिव्यक्ति न्यारी।
इस जनम में हम मिले न मिलें कभी,
अपना मिलना हम वहीं याद करेंगे।
पलकों में चेहरा तुम्हारा मुझे याद आएगा,
भले ही जिंदगी के आखरी सांस पर मैं रहूंगा। “
– सुश्या
