१०. ” इंतज़ार करते-करते “
(…..आगे…..)
राह तकते-तकते थक गया था सुश्या बेचारा,
Accident की ख़बर ने दिल में भर दिया किनारा।
Coffee भी न पी, बस निकल पड़ा फ़िक्र में,
BJ हॉस्पिटल पहुँचा, दौड़ता हुआ सुश्या रुकी सी सांस में।
सुशी को आयी खरोंच और परेशान थी पैर के मोच से,
दोस्त उसके सारे तभी निकल पड़े थे Hospital से,
फोन पे उसकी सिसकियाँ, दिल को चीरती,
सुश्या ने नर्मी से कहा, “मैं हूँ न, क्यों भला डरती?”
“आज नहीं तो कल मिलेंगे” कहकर उसे हँसाया,
लाया था जो चॉकलेट, खुद ही चुपचाप खाया।
…
