हिल स्टेशन के बादलो पे
आखरी लेक्चर ऑफ था,
कॉलेज की बालकनी में खड़ा था,
बारिश का मौसम था,
इंद्रधनुष भी मुस्कुराह रहा था,
पंछी उड़ रहे थे ऊपर आसमान में
तितलियां खिलखिला रही थी नीचे बगीचे में
देख आकाश पल भर में लगा ऐसा,
आसमां पे राज करता है पंछी जैसा,
काश मैं भी पंछी होता,
ऊंचे आसमान को छूं पाता,
चुपके से एक खयाल आया,
मन ही मन मैं मुस्कुराया,
अश्विनी, अमीन, अर्णव, कीर्ति, वृषाली, और मैं,
निकल पड़े घुमने पास के हिल स्टेशन के बादलों पे
