सोच, कर्म और भाग्य
कई बार हम देखते हैं के कुछ लोग लेन-देन को देखते हैं; सामने वाले व्यक्ती से हमे क्या मिल रहा है, क्या नहीं मिल रहा है, इस आधार पर उस व्यक्ती की ओर देखा जाता है.
कूछ रिश्ते स्वार्थी एवं दिखावे के अपनेपन से प्रभावित होते है. देखां गया है की अनजाने मे, कोई संबंध ना होते हुए भी औरो के बारें मे यह सोच कर कुछ लोगो के मन में ईर्ष्या उत्पन्न होती है जिससे भगवान भी नहीं छुटते… की जो किसी और को मिल रहा है वो हमे क्यो नहीं मिल रहा….
अंनजाने मे व्यावहारिक नजरिया बन जाता है जिससे रिश्ते मे बनी एक निस्वार्थ संबंध की भावना धीरे धीरे दूर हो जाती है और कोई भी हक ना होते हुवे भी ऐसो का मन बार बार विद्रोह कर जाता हैं.
सच तो हमारे कर्म ही हमारा फल तय करते है, जिसका हम स्वीकार करते है तो आगे का मार्ग भी सुखदायी होता है .
वास्तव में, मुझे लगता है कि हम स्वाभाविक रूप से जीवन में अपने मन और कर्म का प्रतिबिंब देखते हैं.
कुछ लोग हमारी प्रवृत्ति के विपरीत हैं, तो हम आमतौर पर ऐसे लोगों के साथ समझौता कर लेते हैं और अनेक मौके दे रिश्ता आगे बढाने की कोशिश हो जाती है, लेकीन यहाँ किसी एक ओर से गलती बताना और दुसरी ओर से वो स्वीकार करना ही काफी नही होता, दोबारा वही गलती दोहरायी जाती है जो स्वाभाविक है, क्योकी दोनो ओर से एक दुसरे से विपरीत स्वभाव है, इसी कारण वश ये रिश्ता अजनबी की तरह या एकतर्फा ही होता है.
कई बार तो अजनबी भी निस्वार्थ भाव से करीब आ जाते हैं और अनजाने में ही वो रिश्ता काफी समय तक बना रहता है
वास्तव में, हम वही अनुभव करते हैं जो हम अपने दिल में महसूस करते हैं, जैसा व्यक्तिमत्त्व और चरित्र हमारा होता है…. , खुशमिजाज लोग हर समय खुश दिखाई देते हैं, जबकि कुछ दुखी लोग दर्द को बार बार दोहराते है, वही दर्द फिर से आकर्षित कर जीते हैं और खुशी से ध्यान भटकाते हैं…
अच्छे अनुभव हों तो लोग आसानी से खुश रहते है और आसानी से समाज मे घुलमिल जाते है, सकारात्मक बोलते हैं और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ते हैं…
… अक्सर हमे दिखता है, जो केवल और केवल खुशी महसूस करते हैं, कभी किसी को दुःख नहीं पहुंचाते हैं.. और जो कोई जीवन के सफर मे मिल जाये उन सब को खुशियां बाटते है, दूसरों की मदत करने के लिये उनके हाथ हमेशा आगे रहते हैं
मन और व्यक्तिमत्त्व से निकलने वाली आवाज की प्रतिध्वनी हमे अपनेही जीवन मे देखने को मिलती है.
इसिलिये कहते है,
” अच्छी सोच अच्छे कर्म को और अच्छे कर्म ही अच्छे रिश्ते और भाग्य को निर्माण करते है. “
