मन पवित्र हो तो सहेज हि वो पवित्रता शब्दों में उतर आती है और पढ़ने वालों के मन मे बस जाती है. ऐसे ही कूछ रचनाओं मे साक्षात सरस्वती का निवास होता है, जिन्हे पढ़ते पढ़ते हमारी भी कलम से समीक्षा रूपी माँ सरस्वती के शब्द निकल जाते है.
इसी तरह कुछ शब्द शब्द बनकर तयार हुई एक श्याम स्तुती, उम्मीद है आपको पसंद आएगी …
श्याम स्तुति
१. दिन रात, सुबह शाम,
गाउ मैं तुझे ही श्याम,
ना तूने मुझे जाना,
ना मैने तुम्हे जाना,
एक बार मिल जाओ तो जानू,
मेरे रोम से तुम निकल पाओ तो मानू…
२. बिन तेरे… श्याम कोई हमारा नाही,
बिन हमारे… बढकर दुजा कोई श्याम का भक्त नाही,
३. बस आप लो सिर्फ श्याम का नाम,
मिलेगा चैन, साथ में मिलेगा आराम,
गाते जाओ आप श्याम सुबह-शाम…
४. क्यो न करेगा वो कृष्ण साथ,
सदा रहेगा कान्हा का हाथ में हाथ,
जब मन में हो भक्तिभाव प्यारा,
तब क्यों न रहेगा श्याम सारथी तारणहारा….
५. जहा भी जाएगा वो दिल में ही रहेगा,
मोहन भी छुपने का खेल बड़े मजे से खेलता है,
खुली आखों से कहा वो दीखेगा,
वो तो बंद पलको मे छुपा बैठा है…
६. सारथी बने जिसके श्याम,
हर रास्ता बने उसका आसान,
भटके हुए को रास्ता दिख जाए,
जो भी गाए जीवन धन्य हो जाए,
जीवन में आपके न रहे पूतना, न रहे कोई कंस,
सदा मिलाए आपको सुदामा और राजहंस,
७. और क्या मांगे श्याम से,
धन्य हो हर कोई उसके नाम से,
झोली जो जादुई बनादी उसने,
भर भर दिया सबकुछ श्याम ने,
जीवन में खुशियों के रंग भर गए,
मन आंगन में जो विराजमान हो गए,
इस मन मंदिर की झोली में,
कोमलता है श्याम तेरे ही नाम में,
८. माखन चुराते, दिलं चुराते
दिलं मे ही वो बस गया….
देखो देखो, कीतना सुख
सभी कूछ तो वो दे गया……
९. बहोत ही प्यारी,
और भक्तिमय शिकायत करी….
जिसने फोड़ी गागरिया,
उससे कुछ न कहे कोई,
प्यार भरी देख नजरिया,
उसके सामने सब कुछ भुलजावे हर कोई,
काहे करे मैया से शिकायते,
जब फिर कान्हा से मिलने जी ललचाए,
देखे राधा छुपके छुपके धीरे से वो शरमाए,
देखने जाए उसे दौड़ते दौड़ते,
जमुना में जब डुबकी लगाएं,
१०. ज़रा झांक कर देखो तुम अपने मन में,
गिरिधर बैठे मिलेंगे वहाँ किसी कोने में…..
११. जादू मोहना का सारे जगत पर चला,
युगों युगों तक रहेगा उसका बोलबाला,
उसकी लीला कोई न जाने,
हर मन में बसे श्याम को माने,
सुख दुख में हर कोई जपे उसके नाम की माला,
जादू ऐसा उसने कर डाला…
१२. जब जब सुख हो या दुख परेशान आपको को करते है,
ऊस रोज गिरीधर भी आपके मन आंगन मे उतर आते है,
१३. हर पल कृष्ण देखे राधा, सुने राधा,
न् दिखे, सुने राधा…..
किसी से वो लिखवाये ‘श्याम’ श्याम, ‘राधा’ राधा,
राधा के बीन श्याम आधा…
१४. चरणों में श्याम के जगह जो पाए….
जीवन भर श्याम के भक्ति गीत गाए….
१५. कृष्ण बसे हैं पलको मे मेरे,
बंद करू आखें तो दर्शन हो जाये,
नाम लू मैं उसका शाम सबेरे,
जीवन में जो खुशियों की बरसात कराएं…
१६. मोर पपिहा, कोयल….. सब संदेश उसिका देते हैं,
सुमधुर संदेश के साथ उमंग, आनंद नया जगाते है…..
१७. मन मे जो आए श्याम एक बार,
गीत उसी का गाए ये मन बार बार…..
१८. ऐसा कोई कर्म नहीं जिसका फल न मिले,
श्याम नाम ही आपके जीवन को हर पल संभाले….
१९. भक्त सारे गिरधारी के संग में,
रंगते है उनकी भक्ति रंग में…
२०. एक से बढ़कर एक रचनाए होती है जिनकी प्यारी,
जिन्हे पढ़ प्रभु ने भी सारी खुशियां उनपर पर वारी,
परदे से बाहर आते है कान्हा,
मुस्कान हमारी दोगुना कराते है कान्हा,
भक्त है हम उनके सबसे न्यारे,
वो भी कृपा करते है हम पर ढेर सारे,
देखिए आज कान्हा जी कुछ ज्यादा ही मुस्कुरा रहे है,
परदे के पीछे से बस हमे ही देखे जा रहे है,
भक्त सब उनको जान से प्यारे है,
जिनके लिए वो सदा उनके साथ है….
२१. सुबह शाम गाओ आप श्री श्याम स्तुति,
आपके जीवन में खुशियां दोगुनी होती,
२२. जादू ऐसी श्याम की न्यारी,
बिन मुरली बजे धून प्यारी,
हर दीन रात, सुबह शाम,
मन मन गाये श्याम श्याम,
२३. बाग मे गुलाब का फुल जैसे खिल गया,
सुबह जो कान्हा का ही नाम लीया,
कान्हा भी देखो कैसे मुस्करा गया,
हर रोज आपने श्याम स्तुती जो गायी,
रचनाओं में देखिए श्याम की खुशियां कैसे समायि,
इसीलिए कान्हा ने आज मुझसे ही रचना लिखवायि….
09.04.2023
