” शादी जबसे हुई है “
बस भी करो अब,
सालों पहले मंजर ही कुछ अलग था,
पहला कदम मैने ही हमारी कहानी का उठाया था….
शादी से पहले मेरे हर पल पे हक तुम्हारा था,
एकदूजे की सासों में बसेरा तेरा मेरा रहता था,
याद तुम्हारी आते ही मेरा काम से छुटकारा होता था…
तारों को देख रातभर हमारा कॉल यूं चलता था,
भागते हुए मोबाइल को पास मैं लेती थी,
हॉस्टल की बालकनी में बैठ बात तुमसे किया करती थी….
शादी जबसे हुई है ,
भागदौड़ में हम अब जीते है,
बच्चों को भी स्कूल में हम भगाते भगाते हंसते है,
हर पल फिक्र हमे-तुम्हे सबकी होती है,
अपने आपको अनदेखा कर दिन रात तू हम दौड़ते हैं,
शादी जबसे हुई है,
तुम्हारे मेरे हर पल पे अब हक किसी और का आ गया….
24.08.14
