५. ” अनोखी सी नशा “
(…..आगे…..)
सुशी के दिल में भी उठी एक हलचल,
आस मिलन की और भीगी उसकी सांस….
सुशी के रास्ते में हैं कई कांटे,
कुछ पैरों को चुभते हैं, तो कुछ मन को,
यहाँ किसे है फुर्सत किसी और को देखने की,
सब दौड़ रहे हैं खुद को तलाशने में,
प्रेम की हवाएँ यूँ बदलती हैं दिशा,
भटके मन को दिखाती हैं पगली आशा,
आज की मुलाकात का होगा एक अलग ही नशा,
भीगी पलकों में फिर से जाग उठेगी नयी अभिलाषा…
– सुशी
