नागवंशी

आज नाग को दूध् पिलाना, उसकी पूजा करना… इतनाही नागपंचमी का अर्थ हमे पता है|
क्या हमे पता है जिन्हे हम पुजते है, वे ५ नाग कौन है ?
आज भी हम नाग कि प्रतिमा का पूजन करना नहीं भुले |
आज नागों कि नागपंचमी जानी जाने वाली नागपंचमी कि ऐतिहासिकता वास्तव कुछ और है और हमारा दुर्भाग्य् है के हम इस अनभिज्ञता के साथ जी रहे है |
* ये पाँच राज्य एक दुसरे से सटे नागराज गणराज्य की सीमाएँ थीं।
* पांच नागराजों की मृत्यु के बाद, नागा लोगों ने उनके जन्म के उपलक्ष्य में हर साल “नाग पंचमी” दिवस मनाया।
* समय के साथ, एक गलतफहमी ने नागराज को “जमीन पर रेंगने वाले सांप” में बदल दिया।
और इस दिन को केवल रेंगने वाले सांपों की पंचमी के नाम से पहचाने जाने लगी और वास्तव में नाग राजाओं की पंचमी काल के साथ लुप्त हो गयी।
१. इनमें नागराज अनंत सबसे महान हैं। जम्मू और कश्मीर,भारत में अनंतनाग शहर उनकी स्मृति का ठोस प्रमाण देता है।
२. उसके बाद दूसरे नागराज वासुकी नागराज कैलास थे, मानसरो से उत्तर प्रदेश क्षेत्र का मुखिया था।
३. नागराज तक्षक तृतीय ने ही विश्व प्रसिद्ध तक्षशिला विश्वविद्यालय की स्थापना की थी। प्लेटो और अरिस्टोटल जैसे विश्वविख्यात तत्वज्ञानीओँने यहां अध्ययन किया।
४. चौथा नागराजा कर्कोटक ने रावी नदी से सटे क्षेत्र में शासन किया।
५. पांचवें नाग राजा ऐरावत (पिंगला) भंडारा प्रांत को आज भी पिंगलाई क्षेत्र के नाम से जाना जाता है।
नाग पंचमी का संबंध नाग “नाग” से नहीं है,
भारत में नाग के “कुलदेवता” वाले पांच शक्तिशाली नाग राजा बने।
१. नागराजा अनंत (शेष)
२• नागराजा वासुकी
३. नागराजा तक्षक
४• नागराजा कर्कोटक
५• नागराजा ऐरावत
*ये पांचों नागा राजाओं के स्वतंत्र राज्य थे।
क्रमश:
