७. ” थोड़े-बहुत stupid “
सुशी खुद से कुछ गुनगुनाई,
जैसे दिल ने कोई धुन चुराई…
(…..आगे…..)
तेरा संदेश जब भी आए,
जैसे जीवन में साँसें समाए,
गाऊं मैं आनंद के सुर में,
तेरे संग जीने का अर्थ समझ आए।
तेरे-मेरे वो शब्द जो कहीं खो गए,
फिर से लौटें ताज़गी संग संजोए,
पगली-सी इस दिल की आशा,
लाए प्रेम की इक नई परिभाषा।
हमारी दोस्ती फूलों-काँटों सी,
हो भाग्य में ऐसी साथ की ख़ुशी,
ना चुभे कोई, ना दुख दे,
एक महक दे मन को,
अर्थ और आनंद एक दूजे के जीवन को।
कहीं तो हो एक ऐसा सच्चा दोस्त,
जो गलती पर डाँटे भी, हो पास हर रोज़,
जो खुद रूठे बेबात कभी,
फिर हँसकर आँसू पोंछे सभी।
यह खामोशी भी बहुत कुछ कह जाती,
हमें खुद से नई मुलाक़ात कराती।
क्या उसका गुस्सा सच में है व्यर्थ?
उसके हर तानों में भी है प्रेम की अर्थ।
चलो बन जाएं ज़िंदगी में थोड़े stupid,
तू मुझे सताए,
और मैं तुझे सताऊँ,
हमारी दोस्ती की पतवार(Shed) बने,
एक नई दिशा की नाव बहाए।
कभी न हो गलतफ़हमी का भार,
यही तो है दोस्ती का असली व्यवहार।
अब मैं, मेरी न रही ज़रा भी,
कैसे कहूं… अब खो गई मैं तुझमें ही ।
– सुशी
