६. ” चंपा ने कहा “
(…..आगे…..)
( “चंपा” यह एक सुगंधित और पवित्र माना गया फूल है,
जिसके आपके जीवन में होने से आपका जीवन भी सुगंध से महक जाता है।)
सुश्या भी प्रतीक्षा में समाया हुआ …
तेरे-मेरे बीच वो(चंपा) बंधन पुराना है,
फिर से खिला वो रंग-रंगन नया है।
भीनी सी महक उसकी साथ तेरे चलती,
हर साँस में वो नई गंध सी मिलती।
तू मुस्काई, तो हवा महकी सजी,
जैसे फूलों में चुपके से तेरी ही बात बसी।
या फिर तेरी खुशबू को उसने चुरा लिया,
मेरे मन मे चंपा को तुम्हें ही महका दिया।
तेरी खुशबू रातरानी सी उसमें घुली,
तेरा चंपा मुझसे बातें तेरी कह गया खुली।
आज की ये मुलाक़ात कुछ खास लगे,
प्रेम की खुशबू जैसे गगन में रमे।
– सुश्या
