कॉलेज की कहानी
इस गर्दिश में कुछ तो बह गया,
हस्ती हुई आखोंं से एक आंसू बह गया ,
खुदा की इस दुनिया में दोस्तों कि दुनिया बिछड गयी,
चाय् के साथ करते है रोज अपने आप से गुप्तगू,
जायके के साथ खुदसे एक बार रुबरु,
खो गये कहा सब फूंग्-शुक्-वांगडू
चलते चलते सारे दोस्त छुट गये,
पीछे जाने के सारे रास्ते भी मीट गये,
पता हि नही चला कब वो कैसे, कहा मूड गये,
चैन और सुकून तो मानो पंछी बन उड गये,
चलते चलते हम ना जाने कहा खो गये…..
हर दिल में है कॉलेज कि कहानी,
क्या यही है हर किसी कि जीवनी…
