कॉलेज का पहला दीन
वो कॉलेज का पहला दिन,
आज भी याद आता है,
सीढ़िया चढ़ते चढ़ते अहसास अलग सा होता है,
सीनियर्स भी सुबह जरा दौड़ते हुए दिखते है,
सीनियर्स को देख कर दिल थोड़ा घबराता है,
कॉलेज के बाद ” है, यू, फ्रेशर, ब्लैक सैक, कम हियर,”
सुनकर अनसुना कर स्पीड से पैर चलते है,
दूसरे दिन आत्मविश्वास से क्लास रूम आ जाता है,
रैगिंग का अनुभव सुन दोस्त आप बीती सुनाते है,
लड़किया भी यहा, जूनियर्स को नाच नचाती है,
सुनकर ये आप बीती,
गुल हो गई दिमागी बत्ती,
दोस्त था एक सीनियर, 
बोला, ” मेरे होते हुए तू कैसिसे मत डर,
फिर भी, काम है मेरा समझना,
कभी सीनियर का दिल न दुखाना,
ऊंचाई चढ़ने के लिए पड़ता है थोड़ा झुकना,
दिल में नम्रता रखना, दिमाग में शान्ति रखना,
इंट्रोडक्शन अपना आदर के साथ देना,
हात लगाए कोई तो नाम मुझे बोलना,”
कहकर इतना मुझे दोस्त प्यारा चला गया,
हॉन्टेड माहोल में जैसे सुकून मुझे दे गया,
फिर, बच्चा सा कोई आया,
बोला, ” कल क्यों तू भाग गया? “
कहा मैने, ” भाया,
कहासे तू आया,
मामला मेरा और सीनियर का है,
तू क्यों पूछताछ करता है ?
फ्रेशर ने विनम्रता से बात यहां करनी है “
आय कार्ड उसने जब दिखाया,
मानो दिन में ही तारा कोई चमक गया,
दिल ने भी मान लिया भाई अब तू फस गया,
लॉन में मुझे वो भाई ले गया,
कल के सीनियर्स ने स्वागत किया,
मासूम इस फ्रेशर को सीनियर्स ने अब घेर लिया,
दोस्त का नाम जब मैने बताया,
काम मुझे बिना हात लगाए दिया,
रैगिंग मेरी वो पहली और आखरी थी,
सुन कर जिसे मैं पसीना पसीना हो गया,
सीनियर्स की क्लास मे अब एक्ट्रेस का वर्णन सुनाना था 
दुसरा टास्क पूछा तो सीनियर लड़कियों ने मना किया,
आंखे झुका के, नजरे चुराके मैने दिल थाम लिया,
ना जाने कैसे मैने वहा एक्ट्रेस नेहा का वर्णन किया,
और कुछ अकेले में होने से ये कई गुना अच्छा था,
सुनकर सबने फिर मेरे लिए तालिया बजाई,
सीनियर्स से वही मेरी होगई दोस्ती और दिल जमाई,
मासूमियत की दुनिया से बाहर वो पहला कदम था,
हर कदम, मुश्किल के साथ हर सीनियर, दोस्त साथ खड़ा था,
सुनाकर वो किस्सा आज भी रैगिंग दोस्त मेरी लेते है,
चाय, कॉफी, सँडविच, आलू के पराठों के साथ ठहाके हसीं के लगाते है….
