कुल्हड वाली (चाय)
जब जब बात होती है चाय की
याद तुम आती हो,
प्याली चाय की दिखतेही
कुल्हड के साथ तुम दीखती हो,
कभी कभी जब आती है चाय मेरे सामने,
कहती है मुझसे वो कुल्हड़ के अफसाने,
थंड भरी बरसात मे तुम्हारा साथ होता था,
जैसे भीगे सावन में मन भी झूम उठता था,
पकोड़ों के साथ तुम और मैं बतियाते थे,
आंखो ही आंखो में एक-दूसरे के खो जाते थे,
बरसात के शाम में महफिल चाय की सजती थी,
थकान भरे मन को फिर स्वर संगीत तुम सुनाती थी ,
मैने भी है लायी फिर कुल्हड़ सी प्याली,
न कुल्हड़ रहा अब न रही कुल्हड़वाली,
चीनी प्याली के साथ है यहां कॉफी कोल्ड वाली,
बिना कुल्हड़ के भी सुहाती ये फ्लेवर प्रीत वाली,
बारिश की इस भीगी मिट्टी में
आज फिर वही खुशबू है,
हमारे मिलने के इंतजार में
देखो कुल्हड़ मे कॉफी जायकेदार है….
